Saturday, 18 April 2015

Atonement प्रायश्चित द्वारा सुधार

एक लड़का था  नाम था विजय ।वह  दयालु था । किसीका दुःख देखकर  पिघल जाता था ।   गर्मी के दिन थे  ।चिलचिलाती  धूप  में  लोग जब  काम पर जाते थे तो रास्ते में प्यास के  कारण  बेहाल होजाते थे । विजय ने उनकी परेशानी महसूस की । उसने  एक कम किया ।  वह रस्ते में एक मटका पानी से भर कर बैठ गया । साथ में गुड भी रख लिया और  आने जाने वालों को गुड के साथ  पानी पिलाने लगा । लोगों को बहुत  ख़ुशी मिलती ,सभी  उसे  आशीर्वाद देते हुए जाते ।
        वहां के राजा ने  उसकी  प्रशंसा सुनी तो वह देखने  आया ।उसने भी  पानी  पिया  और इतना खुश हुआ कि अपनी  बेटी की  शादी  भी  उसके साथ  कर दी
और  राज काज  सिखा दिया ।   बुजुर्ग होने पर   अपना    राज्य भी दे दिया ।परन्तु  विजय ने  पानी  और  गुड खिलाना नहीं छोड़ा ।  कुछ दिनों के बाद उसने जगह जगह  प्याऊ बनबा दी  ताकि  यात्री गण  पानी  पी सकें ।
         लेकिन  प्रभुता  पाय  काहि  मद  नाहीं  "बड़ाई पाकर विजय  बदल गया ।लोकप्रियता ने उसे  गर्व से भर दिया ।अब वह  पानी केबदले  पैसे लेने लगा । गरीब लोग  पैसे न होने के  कारण प्यासे ही रह जाते ।  इससे  उसकी  बदनामी  होने लगी ।  इत्तफाक की बात है कि एक बार  विजय  जंगल में  आखेट करने  चला गया ।   काफी  देर खेलने के बाद  उसे  प्यास लगी ।   चारों ओर देखा  कहीं पानी  का  निशान् भी नहीं था  ।तडप ने लगा  दो घूँट पानी कोई  पिलादे । अब उसे  गरीबों  की प्यास  याद आई  । वह अपनी ना समझी पर  बहुत  पछताया   । तभी  उसे एक  झोंपड़ी दिखाई दी । आवाज देने पर एक  बूढ़ा आया उसने विजय को पानी पिलाया और ठहरने को  चारपाई दी  । उसकी सेवा से खुश होकर  विजय ने उसे  कुछ रूपये  देने  चाहे , पर  बूढ़े ने यह कहकर मना  कर दिया कि वह कोई विजय नहीं है जो पानी के पैसे  ले ।
   यह सुनकर विजय की  आँखे शर्म से झुक गईं  । उसने बूढ़े से  क्षमा मांगी  और  राज्य में पहुँच कर  पानी के  पैसों के लेने पर  पाबंदी लगादी ।
  शिक्षा-----   कभी  लालच न करो ।सदा  नेकी और भलाई का  काम  करो ।यही  सच्ची  मानवता है । सच्ची प्रभु भक्ति है ।

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