Tuesday, 26 August 2014

संकल्प का बल power of determination

डाक्टर अम्बेडकर स्वयम दलित  वर्ग के थे  । अत;दलितों व्  शोषितों के दर्द को अच्छी तरह समझते थे ।  वे  चाहते थे कि दलित वर्ग को भी सामान्य वर्ग की तरह जीने का अधिकार  मिले ।उन्होंने  दलित  हित में कार्य करना  आरम्भ कर दिया ।इस क्रम में   mumbai   legislative  assembly ने एक बिल पास किया ।जिसके अनुसार  कुए  और तालाब     सार्वजनिक   प्रयोग  के लिए  खुले कर दिए गए ।  कानून  के  अनुसार इन  जल  स्रोतों पर किसी एक  का अधिकार नहीं  रहा ।   हर व्यक्ति  इसका उपयोग  कर सकता था । यह  निर्णय  भी  लिया  गया कि  कोलाबा   जिले में स्थितं  महानगर  पालिका के  टेंक का पानी   दलितों  द्वारा  प्रयोग में  लाया जा  सकता है ।  कानून  तो  बन  गया पर  अमल  में  लाने  का  साहस किसी में  न था ।  सवर्णों के  विरोध का  भय था ।
तब  डा   अम्बेडकर  ने  घोषणा की कि वे  स्वयम  कोलाबा  स्थित  टेंक  का पानी  दलितों  के लिए  खोलेंगे ।
   उनकी  इस  घोषणा से खलबली मच गई । सवर्ण  समाज में क्रोध था ।  डा  अम्बेडकर ने  दलितों  काएक  समूह बनाया  और  19   20  मार्च   1927 को  टेंक का  पानी  खोलने  का  एलान  किया ।  निश्चित  तारीख को  डा अम्बेडकर  कोलाबा  आये  । वहां सवर्णों की बड़ी भीड़ थी । डा अम्बेडकर ने सवर्णों का गुस्सा देखा   परन्तु बिना  किसी घबराहट के  शांत  भाव से जाकर टेंक खोल  दिया ।पानी की धारा बह निकली ।  दलितों  ने  प्रसन्न होकर  डा अम्बेडकर का  जयकारा  लगाया । और पानी  पीने  लगे ।
  सवर्णों को अपना क्रोध  दबाना  पड़ा ।  डा अम्बेडकर  दलितों   के लिए कुछ  बेहतर  करने का  संतोष लेकर वहाँ से  लौट गए ।  
दृढ निश्चयी  के लिए शूल भी   फूल  हो  जाते हैं  वस्तुत:  पक्का  इरादा ही  हौसला देता है    जो  बाधाओं से  पार  ले  जाता है ।

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