Wednesday, 13 August 2014

जीवन में सुखों और दुखों से कैसे बचें

संतो   का इ क  गाना है---सुख दुःख तो काया का गहना ,मानव बना  खिलौना  ।
किसी  शायर ने  लिखा है  --मेरी ख़ुशी से  मेरे  दोस्तों को गम है  शमीम ।
मुझे भी  इसका गम है क्या किया जाये   ।
  अक्सर हम दूसरों को अपनी  ख़ुशी का  निर्माण  करने  का  अवसर देते हैं । और होता यह है   कि  कई बार वे  हमारी  रूचि के  अनुरूप ख़ुशी नहीं  दे पाते तो हमें  बड़ा  बुरा लगता है और हम  उदास हो जाते हैं कई बार  अवसाद में भी घिर जाते है ।   तो   सचाई यह है कि हम को इस ख़ुशी के बारे में औरों की सलाह न मान कर अपने भीतर  ख़ुशी    खोजनी चाहिए  । व्यक्ति अपनी ख़ुशी  या  आनन्द का  प्रभारी स्वयम है । आपकी  ख़ुशी  आपके भीतर  निहित है । "राम नाम के  सुमरण से ही  हर तेरी  उलझन  सुलझे । "
"  अपनों ने नजर फेरी तो दिल ने दिया साथ  ।  दुनियां में कोई दोस्त तो मेरे काम  आया । "  तो  सम भाव से यह स्वीकार कर लो  कि सुख दुःख प्रभु की तरफ से  आता है ।  यह सत्य है । दुःख की  भी अपनी  महिमा है दुःख हमें माँजता है , हमें सिखाता है  ,जगाता है  गहराई देता है । दुःख हमें इस योग्य बनाता है कि हम सुखी हो सकें ।     दुःख सीढ़ी है सुख तक पहुँचने की । चढ़ने में कठिनाई अवश्य होती है  परन्तु हमें  पहुंचा देती है  आनन्द तक । मोक्ष तक ।
         हम सब  दुखों से  छूटना  चाहते हैं  और  सुख प्राप्त करना चाहते  हैं  तो हमको प्रभु की  और अपनी आत्मा की  इच्छा के  अनुसार काम करना चाहिए ।
प्रभु भी कहता है कि सत्कर्म करो । और आत्मा की भी इच्छा  होती है कि मैं बुराइयों से बचूँ। पर हम उल्टा  काम करते हैं । सच बात तो यह है कि आत्मा  अल्पज्ञ है इसी कारण जो  कम हमें नहीं करने चाहिए वही करते हैं । क्योंकि हमारा वर्तमान समय में लाभ दीख रहा होता है ।
           अत:सन्त कहते हैं कि मन को संयमित रखो  ।दूरगामी  परिणामों पर  नजर  रखो । संतो ने  गाया है 
       " हरि का ध्यान  करो मन मेरे  ,  कट  जायेंगे सब दुःख तेरे सब दुःख तेरे ।सिमरन करले  साँझ सबेरे मिट जायेंगे सब दुःख तेरे   सब दुःख तेरे ।  
जल में थल में नील गगन में जग के  कण कण में प्रभु है समाया ।
जिसने जपि हरि नाम की माला उसने ही प्रभु को है  पाया ।

मिट जायेंगे   जन्म जन्म के  सारे पाप के बन्धन तेरे   बंधन तेरे ।
कौन साथ धन लेकर आया कौन साथ धन ले जाएगा
जग में सबका रैन बसेरा   दुनियां   है दो  दिन का मेला ।
नानक  कहत  जग को यों समझो ज्यों  सुपने रैनाई
हरि का ध्यान  करो  मन मेरे  कट जायेंगे सब दुःख तेरे सब दुःख तेरे ।

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