Wednesday, 23 July 2014

किश्ती में छेद। Hole in a yacht

सारे  संत  एक  कहावत  बोलते है
"मृग  पतंग  गज    मीन  अलि  ,एक ऐव  करे  नाश ।
पांच  विषय  रत  पुरुष  जो  , कौन  बचावे  तास  ।।
अर्थात्  हिरन  संगीत  सुनकर , पतंगा दीपक  की  रौशनी  देख कर  ,हाथी हथनी
का स्पर्श  सुख से  ,  मछली  स्वाद  के वशीभूत  होकर ,   भोंरा  कमल  गन्ध पाकर  मस्त  हो  जाते हैं  और  इस  कारण  अपने  प्राण  गवाँ  देतेहैं   ।
परन्तु मानव  अपनी  इन  पाँचों  इन्द्रियों के  वश  में  हर समय रहते हैं  ।जबकि ये  निरीह प्राणी  केवल  एक एक  इंद्री  के  वश  में  होते हैं । मानव  का तो भगवान ही बचावे ।
मगर   हम  इन  सब  बातों से  कुछ भी  शिक्षा  नहीं  लेते ।परमात्मा ने  हमें  तीन प्रकार की  अग्नि दी हैं  । 1 ज्ञानाग्नि    2   जठराग्नि    3   कामाग्नि  ।
ज्ञानाग्नि  तो   हमें   संसार  की  असारता  समझने के  लिए  दी है ।पर  कुछ ही  लोग  हैं  जो  इस  सच्चाई  को  समझ   पाते हैं
दूसरी   जठ राग्नी  भूख  द्वारा हमारे  शरीर का पोषण करके  शक्ति  बढ़ाती है ।
तीसरी है  कामाग्नि  -यह  संसार  चक्र  चलाने  के  लिए है  परिवार  बनाओ  और प्रभु की  उपासना करो । पशु पक्षी  स्वाभाविक रूप से  ऋतू  काल में  अपनी  मादा से ससर्ग  करते हैं और संसार क्रम   जारी  रखते हैं  । पर  मनुष्य  तो  हर  समय  ही  काम  पीड़ा  से  पीड़ित  रहता है ।और  अमर्यादित  होकर अपना भला  बुरा भी    भूले  रहता है  ।इस  बीमारी  से समाज  में  एक गलत   सन्देश  जाता है । इस सम्बन्ध में  एक  घटना  कहना  चाहूँगी ।
     जुनैद  एक teacher है  ।उसकी पत्नी शाजिया  एक Hospital  में डॉक्टर है  एक बेटी  8rth  class की  student है ।वह  school से  आकर  या तो Home work  करती है अथवा  T.v.  program  देखती है
घर  का काम  एक  गूंगी  लड़की करती है ।  उस  नौकरानी  का पति  guard का  काम करता है  उसी घर में । guard  को  बाहर एक  केविन  रहने को दिया हुआ  है  ।
जुनैद  ज्यादातर घसर  में  ही  रहता था ।   वह उस गूंगी   नौकरानी को  गलत इरादे  से  देखता रहता था । नौकरानी  उससे सहमी  सहमी सी रहती थी । वह उसके गलत  भावों  को समझती थी  । जुनैद  कभी  चाय  लाने के  बहाने  कभी  पानी देने  के  बहाने  बुलाता  था  और  जब  वह   चाय या पानी  लाकर देती तो  वह  अपनी  बेटी की  निगाह  बचा कर  उसका हाथ  पकड़  लेता था  । बेचारी गूंगी   डर के  मारे  थर थाराती रह  जाती थी 
  एक  दिन  तो  हद  होगई  वह  अपनी  बेटी  के  लिए  बाजार  से  कुछ  dresses  लाया  तो  उस  गूंगी  के लिए  भी  एक  dress ले आया और  उसे  देते  हुए  बोला  कि   इनको  पहन ले  तू  और  भी  सुन्दर लगेगी ।  लेकिन वह  शान्त रही और अपने कमरे  में  जाकर  फेंक दिए ।  वह  इशारों  में  अपने  मालिक  की  करतूत  पति  को  बताती रहती  थी  पर  वह  भी  मजबूर था  । वक्त  का  इन्तजार  कर रहा था ।
    इधर  जुनैद के दिमाग  में  काम  वासना ने  परेशां करना शरू कर दिया ।आज शाजिया  की dutyरात की  थी  अच्छा  मौकाथा  बेटी  के  सो जाने के  बाद वह  गूंगी  के  कमरे  में पहुँच गया  और  उसका  सतीत्व  भंग कर  दिया  । वह  गुंगी  खूब  रोई  चिल्लाई  ।  उसकी  चिल्लाहट  सुनकर  साईना उसके कमरे में गई  । वहां अपने  पिता की  काली करतूतें  देखकर   डर गई। वह  इतनी डर गई की वह पिता को  देखते  ही छिपने  लगती थी  । 
  अगले दिन  सुबह अस्पताल से शाजिया  घर आई ती  साईना उससे  लिपट कर  खूब  रोई  और सहमी  सहमी  माँ  के साथ   ही रही ।  पूछने पर  साईना ने सारी बातें  माँ को बताई । माँ तो सुनकर दंग रह गई  ।
  इस  घटना  के  दुसरे  दिन ही वे दौनों  गार्ड और  नौकरानी  घर  छोड़कर  अपने  गाँव  चले गए । शाजिया को  ऐसी उम्मीद न थी । उसके मन में पति के लिए घृणा  पैदा हो गई । अब जुनैद को लगा कि  ये उसने क्या किया ? पछतावे की  अग्नि में वह जलने लगा । वह  खुदा से  अपनी करनी के  लिए  माफ़ी  मांगने  लगा   ।मन्दिर मस्जिद जाने लगा  और  खुदा से  गुनाह की  सजा   माँगने लगा । सबसे बड़ा झटका जुनैद  को  यह लगा कि उसकी स्वयम की  बेटी  उससे नफरत करने लगी ।यदि  साईना  उसका  यह कृत्य  न देखती तो  उसका व्यभिचार  आगे भी चलता रहता।  नौकरानी तो  गूंगी  थी  वह कैसे बता  पाती ।
              शाजिया से  उसने  अपने गुनाह  माफ़  करने  के  लिए   प्रार्थना की। परन्तु  शाजिया  का जबाव था कि माफ़ी  का  सवाल ही  नहीं है । यदि मैं  माफ़  भी  कर दूँ   तब भी  क्या  तुम्हारा  पाप  तुम्हें  चैन से  रहने  देगा ।
       वह घर  से  निकला  । टैक्सी  वाले  को  बुलाया । चालक  ने  पूछा  साहब  कहाँ  जाना है  ? बड़े  अस्फुट  शब्दों  में  उसने कहा  पुलिस स्टेशन ।

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