Thursday, 8 May 2014

Acceptance Of Unconcious Mind.

हमारा  मष्तिष्क दो  प्रकार का  है  चेतन -अवचेतन । 
चेतन  mind  ताज़ी  ताज़ी  ख़बरों  से  सम्बन्ध रखता है  ।   बाद  में  यही  ख़बरें  अवचेतन  mind   में  store  हो जातीं  हैं यानि  कि  अवचेतन शरीर के  विचारों का  स्टोररूम  है ।  कई कई  जन्मों  की  बातें  अनुभव  इसमें  संग्रहीत होते हैं   चेतन  मष्तिष्क का  दायरा  9%  होता है जबकि अवचेतन  का  दायरा 91% होता है ।
       इस प्रकार    अबचेतन  मन  असीम  जीवन  और  असीम  बुद्धिमत्ता  के  सम्पर्क  में रहता है ।सभी  प्रेरणाएं  महत्वाकांक्षाएं और  सपने अवचेतन से ही  उत्पन्न  होते  हैं ।  लोगों में  जो  गहन  विश्वास  होते हैं और जिनके  बारे  में  वे   तर्क वितर्क नहीं  कर पाते   वे  सब  अबचेतन मन की  प्रोडक्ट  हैं ।
     हमारा  अवचेतन    हमको  अपनी  अनुभूतियों  संकेतों  के  द्वारा बातें  करता  है ।यह हमेशा प्रेरित  करता है कि उठो विकास करो ।आगे बढो । प्रेम करना  या दूसरों   का  जीवन  बचाने  की  प्रेरणा  अवचेतन  से ही आती  है । यह  दिन  रात  काम करता है  ।  यह हमारे  शरीर का  निर्माता है  । लेकिन  हम  इसके  निर्माण को  देख या  सुन  नहीं  सकते । यह  बिलकुल  खामोश  प्रक्रिया है ।
                हम सब जानते हैं कि हमारी  सारी  इच्छाएं  प्रार्थनाएं  सफल नहीं हो पातीं  तो हमको  चाहिए  कि अपने  विचार  या आग्रह  अपने  अवचेतन  से  स्वीकृत  करवाएं   । इसके  लिए  हमको  कुछ  प्रयोग  करना  होगा  ।
प्रयोग की विधि यह  है -----------
         जब आप सोते  समय  उनींदी  अवस्था  में  पहुँचें  ।  चेतन मन  उनींदी  अवस्था मेंकाफी हद  तक  डूब  जाता है   ।यह समय  आपके अवचेतन को  सराबोर करने के  लिए  अच्छा है ।सोने से  ठीक पहले  और  जागने  के ठीक बाद  अवचेतन  ज्यादा  सशक्त  होता है । इस अवस्था में कोई  भी  नकारात्मक  विचार और  पिक्चर  नहीं होतीं  जो  हमको करने  के  लिए   नकारातीं  हैं  और  अवचेतन को करने से  रोकतीं हँ ।जब हम  इच्छा  पूर्ति केलिए  रोमांचित  होते हैं  तो  हमारा  यह  अवचेतन  मनोकामना  पूरी  कर  देता है ।इस  तरह से  हम अपनी  निर्देशित  और  नियंत्रित  कल्पना  को  सुलझा  लेते  हैं ।मन  ही  मन  कहो  कि यह  होगा  अवश्य  होगा  ।
      

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