Saturday, 8 February 2014

process of meditation

उआत्म    निरीक्षण  करना  ध्यान  है   बाहर  से  आँख बन्द कर  लेना  अन्तर्मुखी होना  Meditation    है ।
              किसी  शान्त  स्थान में   meditation   करने के लिए  आसन  बिछाइये  ।  स्वास्तिक मुद्रा  में  यानि  पालथी लगाकर   बैठिये । ऑंखें  बन्द रखो।  श्वांश  धीमी,  शरीर शिथिल  हो । मन ही मन  कहो  कि मैं  एक  आत्मा हूँ  । इस शरीर को  चलाने वाली  एक   चैतन्य  शक्ति हूँ  । मैं आत्मा एक अति  सूक्ष्म ज्योतिर     बिन्दु हूँ ।   शरीर मेरा रथ है इस पर सवार होकर मैं  शरीर की  कर्मेन्द्रियों द्वारा  कर्म  करती हूँ । यह शरीर मेरा वस्त्र है । इसको  धारण कर मैं आत्मा एक्टर के समान  इस  सृष्टि में  अपना  पार्ट  अदा कर रही हूँ ।
मैं  परमात्मा  का अंश हूँ ।अत: जो गुण परमात्मा में हैं वही गुण  मुझमें हैं
       ध्यान  में ही  भावना करो कि   मैं  शरीर से  भिन्न हूँ  । परमात्मा की तरह   मैं  भी  निराकार हूँ  । मैं भी  शक्ति  का केंद्र हूँ  ।मेरा नाश नहीं  हो सकता ।जल
मुझे  गला  नहीं सकता वायु मुझे  सुखा नही  सकती  अग्नि मुझे जला नहीं  सकती ।  मैं  अखण्ड हूँ  मैं  सूर्य समान तेजस्वी हूँ मेरे  इर्द गिर्द   मेरा सारा  संसार  घूम रहा है ।
  परमात्मा  सत चित आनन्द है  ।मेरा होना भी सत्य है  मैं  चेतन्य  भी  हूँ  परन्तु
आनन्द के लिए मैं  परमात्मा  की  शरण  लेती हूँ । परमात्मा  आनन्द के  सागर हैं  ।मैं  आनन्द  की  प्राप्ति के  लिए ही  उपासना कर रही हूँ ।
        अब  मैं आत्मा  प्रभु के  पास  जाने  के  लिए  आकाश  में  उड़ रही हूँ।
परमधाम  में  मेरे  प्रभु  विराजमान है   वहाँ का  वातावरण एकदम  शान्त है प्रभ  शान्ति के  सागर है उस सागर की  तरंगें  मुझे  भी  शांन्त कर रही हैं ।  प्रभु ज्ञान के सागर हैं  ।ज्ञान की  लहरें  मुझे  भी  ज्ञानी  बना रही  हैं ।प्रभु  आनन्द  और  प्रेम के सागर हैं   उस  सागर की  तरंगों  से  मुझे  भी  आनन्द और  प्रभु  प्रेम  मिल रहा है ।।
अब  धीरे से आँखे  खोलो  ।परम पिता  को धन्यवाद दो   कि उसकी  कृपा  से  हम उसकी उपासना कर सके ।  तीन  बार  ओउम  का  उच्चारण  करो  । भाव करो  कि अस्तित्व जीवन्त है  संगीतमय है  ,इसकी  तरंगें मुझ  आत्मा  में  पुलक
और  प्रसन्नता  भर रही हैं । अपने शरीर को एक container   समझो  और भाव करो कि इसमें  निराकार भरा हुआ  है ।अपने आप को  प्रणाम करो  ।
     साधको------- meditation   करते समय  इतना  ध्यान  रखना है कि हम  निर्विचार  रहें ।  यदि  मस्तिष्क  में विचार  आने  लगें  तो  आप उनको  ऐसे  देखें  जैसे  अपने घर पर  खड़े होकर  सडक  पर  चलते  हुए  लोगों  को  देखते  हैं
उनमें रस न  लें । दूसरी बात  यह  है कि  अपनी  चेतना   यानि कि ध्यान  आँखों  के पीछे  दौनों  भ्रकुटी  के  बीच  रखें   अभ्यास होजाने पर  आनन्द  आने लगेगा                                         गीत गाओ --**-- तेरी  कृपा  परमात्मा मुझ पर बनी रहे   ।
                  ये दिल  तुम्हारे प्यार से  हरदम  धनी रहे ।

                          इति 

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