Tuesday, 7 January 2014

रहना नहीं देश विराना है we are just Guest

मेरी  मेरी  करता  फिरता   साँझ  ढले  उड़  जाना है   ।
ना  घर  तेरा  ना  घर  मेरा  चिड़िया  रैन  वसेरा  है   ।  पंछी रे  देश  विराना है ।
जिनके  संग तू  ढू ढें राहें   होकर मस्त  दीवाना  ।
उड़  जायेंगे   गीत  सुनाकर   पिंजरा  देख  पुराना  ।  पंछी रे  देश विराना  है 
माया के  हैं  खेल  निराले  ,बन्धु  नाती साथी  सारे  ।
काल  नगाडा  जब  बजेगा तब   कोई  काम  न  आना । साथी रे  देश विराना है।
  तोड़  के  पिंजरा  उड़  जाए  पंछी  करने  और  ठिकाना  ।
ऐसा  काम  करो  मेरे  यारो  मिट  जाये  आना  जाना  ।पंछी  रे  ।
रहना  नहीं  देश  विराना है । यह  संसार  काँटों  की बाड़ी  उलझ  उलझ  मर  जाना है ।
यह  मानुष  कागज़  की  पुडिया  बून्द  पड़े  गल  जाना है ।
तू तो उड़ता  पंछी  यार तेरा  कौन करे एतबार  ।
नौ  खिड़की कापिन्जरा तेरा  खुले  पड़े  सब द्वार
आना  जाना  मुश्किल  तेरा  जाना  सहज  शु मार  । 
बाग़  लगाए  बगीचे   सजाये किये  सभी  व्यापार
कहना  एक नहीं यह  माने  निकल  जाए बर जार  ।
रहना  नहीं  देश  विराना है  । सब  चला चली  का खेला  दो  दिन का  दर्शन मेला
कोई  आज  गया  कल  जाबे  कोई  गठरी  बाँध  सिधावे
अरे कोई  भरे  पाप  का  ठेला  दो दिन का  जग  में  मेला ।

No comments:

Post a Comment