Friday, 17 January 2014

प्रभु दर्शन की विधि Do it

एक  सूफी  सन्त थे नाम  था  सन्त  सादिक । एक  दिन एक व्यक्ति  उनके पास  आया और  बोला  कि  आप  अल्लाहताला  से  एकाकार  हो चुके  हैं ।  मुझे  भी उनसे  मिलवा  दीजिये  ।  सादिक मुस्कुराए  कहा कि क्या  तुम्हें मालुम नहीं कि अल्लाह ने  मूसा  से कहा  था  कि तू मुझे  देख  नहीं  सकता  ।
         वह व्यक्ति  बोला  हाँ  मैं  यह  जानता  तो  हूँ   पर  एक  व्यक्ति  यह  भी  कहता था कि मेरे दिल ने  परवरदिगारको देखा है  । कोई कोई यह भी कहता है कि मैं  उस भगवान् की  आराधना  करूँगा   ताकि  मैं  उसके  दर्शन  कर सकूँ  । 
                      यह सुनकर  सादिक  ने  अपने  शिष्यों  को  आज्ञा दी  कि इसके हाथ  पैर  बांधकर  नदी में    डाल दो । ऐसा ही किया गया  । वह पानी  में  डूबने  लगा  ।  उसने  चिल्ला  चिल्ला कर  सहायता माँगी किन्तु  कोई  आगे  नहीं  आया  ।
अन्त में  निराश होकर  उसने कहा  या  अल्लाह  !  उसके  इतना कहते  ही  सादिक  ने  उसे  नदी से  बाहर  निकालने  का  आदेश  दिया । जब वह  बाहर  आगया तब  सादिक ने  पूछा  "क्या  तूने  अल्लाह  को  देखा । " वह बोला  मैं जब तक  दुसरे  को  पुकारता   रहा  तब  तक  पर्दे  में रहा  । किन्तु जब   अल्लाह  से  फ़रियाद की  तो  मेरे दिलमें  एक  सुराक खुला  ।
           तब  सन्त  ने  समझाया   कि जबतक  तू  दूसरों  को  पुकारता रहा तबतक  तू  झूठा था । जब  मूल  परमात्माको  पुकारा  तो  तेरी जान  बच  गयी । अब तू  इसी  सुराक की  हिफाजत कर जिससे  तुझे  ईश्वर  के  दर्शन होंगे  ।वस्तुत:संकट  में मिली  सहायताः  ही प्रभु  दर्शन  है ।यदि  ऐसा  मानकर  हर अच्छे  बुरे  क्षण  में  परमात्मा  का स्मरण किया  जाए  तो अन्तर्मन  में  एक  विश्वास  उत्पन्न  होजायेगा  जो  स्वयम  ही  ईश्वर  बोध  करा देगा ।

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