Wednesday, 15 January 2014

अभी नहीं तो कभी नहीं ।

कहते  हैं  कि  जब वक्त  निकल  जाता कुछ  हाथ  नहीं  आता ।  इसलिए  ओ   मानव !जो  कुछ  करना  है  अब करले  , कल  काकोई  भरोसा नहीं   । जो  बोयेगा  वही फल  खाने  को  मिलेगा ।  इस  सन्दर्भ में  एक  कहानी  है .........
       बादशाह  अकबर  का  दरबार  सजा  हुआ था  ।  सभी  वि द्वत  जन  मंचासीन  थे  बादशाह  को   चार  प्रश्न  सूझे ।  बोला  कौन  बताएगा  मेरे  इन  प्रश्नों  को  ।जो  भी  बताएगा  उसको  भारी  इनाम  दिया जाएगा  ।
             प्रश्न  हैं बताओ  कि  वो  कौन है ,जो  अब  का  है  ?
वो  कौन है  जो  'तब का है '  वो  कौन  है  जो  न   अब  का  है  न तब का  है"
वो  कौन है  'जो अब का भी है  ' और  तब का भी  है  " ? 
  सारे  सभासद  एक  दुसरे का  मुँह  देखने  लगे  । किसी को भी  इद्काकोइ  जबाब  नहीं  सुझा  । 
अन्त में  बीरबल  उठे  और  बादशाह  से  एक  दिन  की  मुहलत  माँगी ।  कहा  अब  मैं  जाता हूँ  आपके  प्रश्नों  के उत्तर  खोज  कर  लाता हूँ  और इस  गुत्थी  को  सुलझाता हूँ 
अगले दिन बीरबल  आये और  अपने  साथ  में  आठ  लोगों को लाये  ।   कहा  जहाँपनाह  ये  रहे आपके  प्रश्नों के  उत्तर  ।
अकबर बोले  इनका  क्या   सम्बद्ध  है  प्रश्नों से  ? ।
बीरबल ने पहली  पंक्ति  में खड़े   दो  राजाओं  की ओर  इशारा किया    , कहा  ये दोनों  राजा हैं   तब के "   पिछले  जन्मों  में  पुन्य  कर्म  दानशीलता परोपकार 
गरीबों की  रक्षा  का  यह फल है कि ये  इस जन्म में  राजा बन  गए  हैं ।
अब ये  बैठे  बैठे  ठाट  बाट  भोग रहे  हैं । ये  दोनों  तब का' "खा रहे हैं ।
  इसके  बाद  बीरबल ने  दो  सन्यासी महात्मा  से  मिलाया   जो  निरन्तर योग  साधना  करते  हुए  पुन्य  एकत्र  कर रहे थे । जिन्होने  ईश्वर  को  प्राप्तकर परमानन्द  को  प्राप्त  करलिया था  । परिणाम  स्वरुप  आगे भी  आनन्द प्राप्त  करते रहेगे । इसलिए  ये  अबके  भी  हैं  और  तबके भी  हैं ।
        राजन्  !अब इनसे  मिलिए  ये  हैं  समाज सेवी  ।ये  अपनी  पूरी मेहनत  और  लग्न सेसेवा कार्य कर रहे  हैं    इसलिए  वर्तमान  में  अच्छा  कार्य  करके  भविष्य  स्वर्णिम  बना  रहे  हैं  इसलिए  ये  अबके  हैं ।
                इसके बाद    बीरबल  ने  दो  चोरों को  मिल बाया    दोनों  के  हाथ बंधे  थे ।कहा ये  चोरी  करके  धोखे करके  लोगों का  धन  हथियाते  हैं  । इन्होंने न पहले  मेहनत किन  अब  कर रहे हैं    । इसलिए  ये  लोग न अबके  हैं  न  तबके हैं  " ।   
           बादशाह  बीरबल  की बुद्धिमत्ता  को  देख  कर  हैरान  रह  गए  ।

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