Monday, 23 December 2013

Vacant space यानि राम की मौजूदगी।

एक  सन्यासी  घूमते   फिरते किसी  परचून  की  दूकान पर  पहुँच गए  ।उस दूकान में  छोटे बड़े बहुत से  डिब्बे पड़े थे । एक   डिब्बे  की  ओर  इशारा करके  सन्यासी  ने  पूछा कि महाशय जी इस  में  क्या है ?
दूकानदार........इसमें नामक  है  ।   सन्यासी  ने  दुसरे  डिब्बे  की  ओर उंगली उठा कर पूछा  और इसमें क्या है   ?    दुकानदार .........इसमें  हल्दी है ।
सन्यासी......इसके  पास  वाले  में  क्या है  ?   दुकानदार ..... जीरा है  ।
सन्यासी  ....आगे वाले में  ?  दुकानदार ....इसमें   हींग  है  ।
इस  प्रकार  सन्यासी  पूछता  गया  और दुकानदार  बतलाता गया  उसमें  धनियाँ  उसमें  मिर्च  ,उसमें  राई ।  आदि   आदि  ।  अंत  में  सबसे पीछे  वाले  डिब्बे की  बारी  आई  ।सन्यासी ने  पूछा  इसमें  क्या है  ? 
दुकानदार  बोला  इसमें  राम  राम  है  । 
सन्यासी  चोंका  बोला राम राम  किस  वस्तु  का नाम है ? दुकानदार ने कहा  महात्मन्  !बाकी  सरे  डिब्बों में  कोई  न  कोई  चीज भरी  है  परन्तु यह  डिब्बा  खाली  है  ।हम  खली  को  खाली  नहीं  कहते  बल्कि कहते  हैं की  इसमें  राम  भरा है  ।
सन्यासी  को  सुनकर  बहुत  अच्छा  लगा    ।उसने  दुकानदार के  सोच  की  सराहना की  कहा  तुम  बहुत  भाग्यशाली  हो  तुम  ईश्वर की  सत्ता  में  आस्था  रखते हो  । कितना  अच्छा  सुझाव  है  कि  खाली  में  राम  रहता  है ।सच कहा  कि भरे  मेंराम को  स्थान  कहाँ  ?
लोभ  लालच   ईर्ष्या द्वेष  और  भली  बुरी बातों सेज्ब तक  दिल दिमाग  भरा रहेगा  तब  तक  उसमें  राम  नहीं  रह  सकता  ।राम  यानी  परमात्मा तोसफ़  सुथरे  मन  में ही  निवास  करता है  ।दूकानदार  की समझदारी  से  सन्यासी  को  बहुत  आनन्द  आया ।

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