Saturday, 21 December 2013

अभिमंत्रित जल purified water

पानी हमारे जीवन का अभिन्न  हिस्सा है  । पानी  से ही जिन्दगी है । मनुष्य शरीर में 70 %  या  90 %पानी है । कहते हैं की की हमारे विचारों   शब्दों  संगीत  आदि का पानी पर  गहरा प्रभाव पड़ता है ।positive विचारों के साथ तथा  सोच  से प्रभावित पनिपीने  पर  लोगों के  स्वास्थ्य में वृद्धि   हुई  है  ।  अनेक  प्रशिक्षण द्वारा इस  बात  को  सर्व  सिद्ध  कियागया  है की पानी की  गुणात्मकता   प्रभावित  होजाती है  यदि  मन की सोच  अच्छी हो ।सकारात्मक सोच  रखने से  तन  मन  बुद्धि  पर  स्वस्थ प्रभाव पड़ता है । अपने शरीर के पानी  को भी अच्छे विचारों  द्वारा  स्वच्छ बना कर्  खुद  को शारीरिक  मानसिक  तथा भावनात्मक  तौर पर मजबूत बना सकते हैं  ।
   एक समूह  द्वारा पानी  कोप्यार भरे  धन्यबाद के    वायाब्रेशन्स दिए गए ।एक अन्य  पानी  को  कुछ  बर्तनों में रखा गया  जिनपर शान्ति  प्यार  आभार आशा  आदि  लिखा हुआ  था ।  इन  सभी  पानी  के  नमूनों  को जमा  कर microscope से देखा  गया तो  सभी samples  केसुन्दर   cristle  विकसित हो गए ।
गायत्री  मन्त्र  से  अभिमंत्रित  जल  रोगी को  स्वस्थ  बना देता है यह जल  जीवन  प्रदाता हो जाता है ।इस प्रकार अच्छे  विचारों  शब्दों व् सोच  द्वारा  पानी के  ढाँचे में सकारात्मक परिवर्तन लाकर   उसकी जिन्दगी देने के  गुण में  बढ़ोतरी  की  जा सकती  है । संत  लोग  कहते  हैं  कि भोजन  व्  पानी  का  सेवन  तनाव मुक्त एवं शान्त मन से ही करना  चाहिए  वर्ना  इसका  सेहत पर बुरा  असर पड़ता है ।
पानी को  रोगहर  भी कहा जाता है  । सूना है  न  कि  "गंगा तेरा  पानी  अमृत  "  पानी जीवन दायिनी  शक्ति है  । इंसान  एक  बार  विना  भोजन  के  तो  आठ  दस  दिन  रह  सकता है  पर  बिना  पानी के  तीन  दिन  भी  नहीं रह सकता  ।
इसीलिए  पानी  को  अभिमंत्रित  करके  पिलाना  किसी भी  प्राणी  को  जीवन  दान देने  जैसा है ।
दर्जिलिग़  की  घटना है  कि एक  व्यक्ति  को भयंकर   कैंसर  हो गया  । डॉक्टर्स  ने उसका जीवन  केवल  तीन  महीना बतलाया । वहाँ  ब्रह्मकुमारी  बहिनों ने  पानी
चार्ज  करके पिलाया ।क्या किया  एक जग  पानी  शिव  बाबा के  कमरे में रख  देतीं थीं  । ब्रह्म मुहूर्त  में  साधक  meditation  करते  थे । सभी  संकल्प  करते थे कि  "मैं  पवित्र  आत्मा  हूँ.." । फिर वह पानी  मरीज  को  पिलाया  जाता  था  । तीन  मास  में ही  वह व्यक्ति  ठीक  हो  गया  । यह है  पानी  की 
शुद्धता  का  प्रत्यक्ष  उदाहरण । तो  पाठको  पानी  को  हाथ  में लेकर कहो  कि
" मैं  पबित्र  आत्मा  हूँ  "  ऐसा  21बार  कहो    तत्पश्चात  पानी  का  सेवन करो         
              ॐ  तत्  सत    हरि  ओम  तत्सत  सर्वे भवन्तु  सुखिन: सर्वे सन्तु 
   निरामया ।सर्वे  भद्राणि  पश्यन्ति   मा  कश्चिद्  दुःख  भाग  भावेतु  ।

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