Sunday, 1 December 2013

सहायता लेना अपनी क्षमता का ह्रास

जबमनुष्य  कितना  भी  स्वाबलंबी  क्यों  न  हो  ,दूसरों  के  सहयोग  के  बिना  उसका  काम  नहीं  चल  सकता ।अपना  यह  जीवन   हम  एक  दुसरे  के  सहयोग  से  गुजारते  हैं  ।  इसलिए  यह  जरुरी  है की हम  दूसरों  से  मदद  लें लेकिन  उसकी भी  एक  लिमिट  होनी  चाहिए  ।क्योंकि  दूसरों  का सहयोगसे  हम तेजी  से  आगे तो बढ़  तो  जाते  हैं  पर  यही सहयोग हमारी  स्वाभाविक  क्षमता के  विकास में  भी  बाधक   बनता  है ।   हम  उसका  सहारा  लेने के  आदी  हो जाते हैं ।
जैसे  यदि  कोई  व्यक्ति  बैसाखी  कासहारा  लेकर  चले  तो  उसे  बहुत  ही  आराम  मिलेगा  लेकिन  उन  बैसाखियों  को कोई छीन  ले  तो वह  धडाम से  नीचे  गिर  जाएगा  ।और  फिर  दुबारा  उठने  में समय  लगेगा । इसलिए  दूसरों  की  मजबूत  और  सुन्दर  दीवारों  का सहारा  लेने  की  बजाय अपनी  कच्ची  और    मामूली  सी  लगने  वाली  दीवार  का सहरालेने  की  आदत  डालनी  चाहिए  ।
पक्की  दीवारें हमें  भरोसेमंद  लगती  हैन्कच्ची  दीवारों  के  ध्वस्त  होने  का  डर रहता है  ।लेकिन  दूसरों  की  पक्की दीवारोंमें एक  अलग  ढंग  कीअनिश्चितता होती है ।उसका  सहारा  लेना  उसकी  मर्जी  पर निर्भर  करेगा  ।वह  चाहे  तो  सहारा दे  भी  और  न दे  भी ।  यानी उसकी  उपलब्धि होना  निश्चित  नहीं ।
समझने  की बात  है  कि जब  हम  किसी  का  सहारा  लेते हैंतो  अपने  पैरों  को  मजबूत  बनाने  का  प्रयास  ढीला  पड  जआता  है  ।  और  यह भी  सम्भव  है  कि हम अपनी कच्ची  और  कमजोर  दिखने वाली  दीवार का  सहारा  ही लेना छोड़ दें तथा   स्वयम स्वावलंबी  बनने  की  आदत    डाल लें  ।
                  तो हमें  शिक्षा  मिलती  है कि हम  दूसरों से  सहायता तो  अवश्य लें परन्तु अपनी  क्षमता का  विकास भी  साथ  साथ  करते चलें ।कहते  हैं  कि......        पराधीन  सपनेहु  सुख  नाहीं
      कर  विचार  देखो  मन  माहीं   ।
एक   उदाहरण  से    दूसरों  के  सहारे  रहने  वाले  का पतन स्पष्ट  हो जाएगा  ।                          एक  बार  एक  चील  जब  उड़ने  लगी  तो   एक  मकड़ी
उसके  पैरों से  चिपक  गयी  और  वहभी  चील के  साथ साथ    पहाड़  की    चोटी  तक  जा पहुंची ।वहां  पहुँचकर वह चील के  पैरों को छोड़कर दूर एक चट्टान पर जा  बैठी । इतने में  हवा का  तेज  झोंका  आया     और  मकड़ी  को
उड़ा कर  जमीं पर पटक दिया ।
सारांश  यह  है कि यदि हम दूसरों पर  dependरहेंगे  तोकभी सफल न हो सकेंगे ।जो लोग बिना  अपनी  योग्यता  और  सामर्थ्य केकिसी दुसरे की  सहायता से ऊंचाई  पर  पहुँच  जाते  हैं  वे  एक  हलके  से  आघात से नीचे  आजाते हैं  ।  अत:  अपनी  क्षमता का विकास करो  ।

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