Wednesday, 13 November 2013

दुआएँ लो बद दुआएं न लो

दुआएं  धन से भी  ज्यादा  मूल्यवान  होती हैं दुआओं  की  शक्ति  का  अनुभव  हमें  संकट  की  परस्थिति  में  होता है   । स्थूल  धन तो नष्ट हो   सकता है    परन्तु दुआओं  रूपी धन ऐसा है  जिसके न  जलने  का   डर  न लुटने का  डर ।दुआओं  का  धन कमाने  वाला  सच्चा  धनवान  या मालामाल  है    स्थूल  धन कमाना  आसान है पर दुआओं  रूपी  धन  कमाने  के  लिए  नेक  कार्य  करने  पड़ते  हैं  ।दुआ  देते  समय तो  आप मालिक  हैं चाहे  कितनी भी  दुआ  दे लो  परन्तुदुआ लेने  के  लिए  खुद  को इस  योग्य  बनाना  पड़ता है 
             दुआ  मानव  को  सुख का  अनुभव  कराती  है  ।तो  बद दुआ   मानव को  दुखों में  ले जाती  है  ।  अत:हमको  चाहिए कि हम  किसी को  भी  बद  दुआ न  दें   और  न  बुरा काम  करके  किसी  की  बद  दुआ लें  । किसी को  बद  दुआ  देकर  ह् म  अपनी  ही  नजरों  से  गिर  जाते  हैं  । नीच  लोग  अथवा  ईर्षालू  लोग  ही  दूसरों  का  बुरा  मनाते हैं  ।  हम  न  किसी को  दुखी  करें  न   सताएं क्योंकि  कहा  है  कि
     दुर्बल को  न  सताइये  जाकी  मोटी  हाय
      मुई  खाल  की  साँस से  सार  भसम हुई  जाय  ।
की बार जब  हमारा  नुक्सान  होता है  तब  हम  कहते  हैं कि न

    । किस  की  बद  दुआ  लग   गई  । मन  से खो कि   "ये  दुआ  है  मेरी  खुदा  से 

                                         किसी  का दिल न  दुखे  मेरी  बजह  से  ।
अये  खुदा  करदे  कुछ  ऎसी  इनायत  मुझ  पर  ।
की  खुशियाँ  ही  मिलें  सबको  मेरी  बजह  से  ।  "
    परमात्मा  से  दुआएं  मांगें   क्योंकि  परमात्मा  का  आशीर्वाद  कुछ  करने  की  ताकत  भर देता है   । विशाल बुद्धि   तथा  दूर द्रष्टि प्राप्त होती है  ।    भगवान् से प्रार्थना है  की हमारे  अन्दर  भी  दैवी  गुण  आयें । हम  आत्माएं भी  उनकी  तरह शान्ति  प्रेम  आनन्द दया के  सागर बन  जाएँ । ईश्वरका  सबसे  बड़ा  गुण  है  क्षमा  करना  ।  जितना  हमारा  विशाल  ह्रदय  होगा  उतने ही  हम  विनयशील  होंगे  और दूसरों को माफ़  करते  रहेंगे  ।
ईश्वर  के गुणों को  धारण  करना  ही उनका  आशीर्वाद  प्राप्त  करना  है ।

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