Monday, 28 October 2013

महामृत्युन्जय स्तोत्र

यरत्न सानु  शरासनम रजता द्रि श्रंग  निकेतनम
शिन्ज्नी कृत  पन्न्गेश्वर  मच्युतानल  सायकं।
क्षिप्र  दग्ध  पुरत्रयं  त्रिदशालये रभि वन्दित
चन्द्र शेखर  आश्रये मम  किम  करषयति  वे  यम:.  ।
        पन्च  पादप  पुष्प  गन्ध पदाम्बुज  द्वय  शोभितम
         भाल लोचन  जात   पावक   दग्ध   मन्मथ   विग्रहम
        भस्म  दिग्ध  कलेवरम  भव  नशिनम  भव  मव्य्यम   ,
चन्द्र  शेखर  आश्रये मम  किम  करिष्यत  वे यम:  ।

     मत्त  वारण  मुख्य  चर्म कृतोत्तरीय  मनोहरम
पंकजा सन   पद्म लोचन पूजिताङघिर   सरोरूहम  ,
देव  सिद्धि  तरंगणी  कर सिक्त  पीत  जटा  धरम
चन्द्र  शेखर  आश्रये  मम  किम  करिषयति  वै  यम:
      
     कुंडलीकृत  कुण्डली श्वर  कुण्डलं वॄषवाहनम
  नारद  आदि  मुनीश्वर  स्तुति  वैभवम  भुवनेश्वरम
अन्धकांत कमाश्रितामर पादपं  शमना न्ताकम
चन्द्र  शेखर आश्रये मम किम  करीषयति वे यम:
           यक्ष राज  सखम  भगाक्षिहरम्   भुजङगविभूषणँ
       शैलराज   सुता परिषकृति चारुवाम  कलेवरम्
     क्षवेडनील  गलं  परुश्वध  धारणम्  मृग  धारणं
चन्द्र  शेखर  आश्रये  मम  किम करिष्यति  वै  यम:
    
      भेषजं  भव  रोगिणाम्अखिल  आपदम् अपहरणाम्
       दक्ष यज्ञ  विनाशिनँ  त्रिगुणात्मकँ   त्रिविलोचनँ
     भुक्ति  मुक्ति  फल  प्रदं  निखिल  अघ संघ निबर्हणँ
   चन्द्र  शेखर  आश्रये मम  किम  करिष्यति वै  यम:

            भक्त वत्सलम्अर्चताम्  निधिम्  क्षयँ  हरिदम्बरँ
           सर्व  भूत पतिम्    परात्पर  अप्रमेय  अनूपमम्
           भूमि  वारि    नभो  हुताशन  सोम  पालित    स्व आकृतिम्
    चन्द्र  शेखर  आश्रये  मम्  किम् करिष्यति  वै  यम :

        विश्व  सृष्टि  विधायिनँ  पुनरेव  पालन  तत्परमँ
    संहरनतमथ  प्रपंचम्   शेष लोक  निवासिनम्
  क्रीड़ यंत अहर्निशिम  गण  नाथ  यूथ  समावृतम्
चन्द्र  शेखर  आश्रये  मम किम  करिष्यति  वै यम:   ।

रुद्रं  पशुपतिम  स्थाणुम    नीलकंठं  उमापतिम् 
नमामि  शिरसा  देवं किम नो  मृत्यु करिष्यति
कालाकँठम कलामुर्ति  कालाग्नि  कालनाशनम   ।   नमामि  शिरसा  देवं  ।
नील कंठम  विरूपाक्षँ  निर्मलम  निरुपद्रवँ  । नमामि  शिरसा  देवं  ।
वाम  देवं  महादेवं  लोकनाथं  जगद्गुरुम  ।नमामि  शिरसा देवं  ।
देव देवम्  जगन्नाथं   देवेश  व्रृषभ  ध्वजम्  ।  नमामि  शिरसा देवं किम  नो   ।
अनन्तंम  अव्ययम्  शान्तम अक्ष  माला  धरम  हरम  ।नमामि  शिरसा  देवं 
आनन्दम  परमं  नित्यम कैवल्य पद  कारणम  ।नमामि  शिरसा  देवं  ।
स्वार्गापवर्ग  दातारम्  सृषटि स्थिति  कारणं ।नमामि  शिरसा  देवं  किम  नो  मृत्यु  करिष्यति  ।

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