Monday, 23 September 2013

To Unite Intimately With God -प्रभु की परणीता

  औरों  के हित  जो  जीता है  ,औरों के  हित  जो  मरता है  ,
उसका  हर  आँसू  रामायण  प्रत्येक  कर्म  ही  गीता है     ।

जो  सहज  समर्पित  जनहित  में होता   है  स्वार्थ  त्याग करके   ।
जिसके  पगतल  चलते  रहते  दुःख  दर्द  मिटाने  घर  घर  के ।

वह  है शंकर  जो  औरों  की    वेदना  निरंतर  पीता है ।
उसका  हर  आँसू  रामायण  प्रत्येक कर्म ही गीता है   ।

जिसका  चरित्र   गंगाजल  सा है  ,  बुद्धि विमल  पावन  उज्ज्वल   ।
जिसके  उर  से  सद भावों  की  धारा  बहती  कल कल छल छल  ।

वह  है  लक्ष्मण  जिसने  हर  नारी  को  समझा  सीता है  ।
उसका  हर  आँसू रामायण  प्रत्येक  कर्म  ही  गीता है  ।

जिसका  जीवन  संघर्ष  बना  औरों  की  गहन  समस्या   है  ।
जग  में  प्रकाश  फैलाना  ही  जिसकी  आराध्य  तपस्या  है  ।

जो  प्यास  बुझाता  जन  जन  की  वह  पनघट  कभी न  रीता  है   ।
जो  औरों के  हित  मरता  है   औरों  के  लिए  जो  जीता  है  ।

जिसने  जग  के  मंगल  को  ही  अपना जीवन  व्रत  मान  लिया  ।
इस  व्यापक जग  के  कण कण  में  भगवान  तत्व  पहिचान  लिया  ।

उस  आत्मा का  सौभाग्य  अटल   वही  प्रभु  की  परणीता  है  ।
उसका  हर  आँसू  रामायण  प्रत्येक  कर्म ही  गीता  है  ।

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