Monday, 2 September 2013

NATURAL SCENERY प्राकृतिक दृश्य,

अरी सखी  अहा  ! क्या  ही  सुन्दर  दृश्य है 
 
वो सूरज  निकला  लाल लाल,  धरती पर फैला  किरण  जाल
कलियाँ  मुस्काई  खिले  फूल  , डाली  डाली  पर  लगे  झूल
मखमल सी  चमकी  हरी  घास ,  मोती  बिखरे  हैं पास- पास
गुनगुना  रहे हैं भोंरे खिल रही है कली कली    डाली  डाली

देखो सखी  ! वेइमान  भोंरे  कैसे  मुस्काएं, हाय कली  यों शर्मायें
घुंघट  में  गोरी  जैसे  छिप  जाए ।  हवा कैसी  हाय  चली   झूम  उठी  डाली  डाली  ।
गुनगुना रहे  हैं  भोंरे  खिल  रही  है  कली  कली    डाली डाली  ।

 अरी  सखी  फूलों  पर तितलियों  को  देख  ,  
कलियों  पर भोरों  को बैठा  हुआ  देख  ,  
पपीहा  की  पिउ पिउ   सुन मन   नाचे  झूम झुमके  ।
घनश्याम को देख  मोर नाचे   घूम घूम के ।
अहा  क्या दृश्य   है  !   कलियों  से   भोरें हैं लिपटे  , चट्टानों से  झरने  बहते  ।
अम्बर से  धरती है  लिपटी ,  चंदा  से  चांदनी   बिखरती  ।
बृक्षों  से  अमर  बेल  लिपटती  , दिव्य दृश्य कुदरत दिखलाती   ।
कितनी  सुन्दर  प्रभु  की रचना  ,   मत  कह  देना जग  है  सपना । 

1 comment:

  1. इस अखिल ब्रह्मांड का जो चंचल कुशल चितेरा है
    उस परम प्रभु के चरणों में शत शत वंदन मेरा है

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