Sunday, 15 September 2013

गलत में सब राजी

एक  था   मुल्ला   ।   नाम  था नसरुद्दीन  ।उसे  एक   स्त्री  से  प्रेम  था ।  वह रोज  उसे  Love letter  भेजता था  । वह  स्त्री  बड़ी  हैरान थी  ।पत्र  बड़े  अदभुत  होते थे  ।एक  दिन   प्रेम  टूट  गया  ।मुल्ला ने  उसे जो  अंगूठी  दी  थी   वह    वापिस  माँग ली  ।  और  कहा कि  वह  सारे  पत्र  भी  वापिस  करो  ।
उस  स्त्रीने  कहा कि पत्रों का  तुम  क्या  करोगे  ?
      मुल्ला बोला सच बात बता  दूँ  ।इन  पत्रों को  लिखवाने  के लिए  मुझे  पैसा  खर्च    करना  पड़ता है ।जिन्दगी  अभी   खत्म  थोड़े  ही  हो  गयी  है   ।एक  प्रेम तो  क्या  ,न  मालुम  कितने  प्रेम  कर  लेंगे  ।
     यह  दुनियां ऐसी ही   मजेदार  है  ।   एक   गाँव   में  कुछ  लोगों  ने मिलकर  एक  मन्दिर बनाया  ।सोचा  किसकी  मूर्ति  स्थापित  करें  तो राम  की  मूर्ति   स्थापित  कर दी  ।राम को  मानने  वाले  आने  लगे  ।  क्रष्ण  को   मानने  वाले  नहीं  आये  ।तो   सोचा  क्रष्ण की  मूर्ति  स्थापित  कर दो   ।  अब  शिव को मानने  वाले  नहीं  आये   ।  ऐसे  ही  हर  साल  मूर्तियाँ  बदलते  रहे   संख्या
थोड़ी  की  थोड़ी  रही  ।
अब  क्या  करें   ? एक  वुजुर्ग  ने सलाह  दी  कि  मन्दिर मस्जिद का  तो  झगडा  रहेगा  होटल  खोल  लो  ।होटल खुल  गया    night club   बनादिया  गया ।
होटल में  हिन्दू  मुस्लिम  सिख  ईसाई  सभी  आने  लगे  ।
        अदभुत है यह दुनियाँ  ।गलत  में  सब  राजी  हैं ,सही में   सारे  विवाद  है   झूठ  में  सब  संगी  साथी  हैं सत्य में   स्म्प्र्दाय्   बन  जाते हैं ।  प्रभु को  स्मरण   करना हो  तो  कोई   इकटठा नहीं  होगा  ।  कई लोग मन्दिर में प्रार्थना  न  कर  दुनियाँ भर  की  बातें  करते  हैं  ।  भगवान की  कोई  बात  नहीं  करते ।।

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