Sunday, 22 September 2013

हे चन्द्र मौलि हे चन्द्र शेखर

हे विश्वनाथ  मनका   चंचल पना  मिटा ,कुटिया  में  शांति  के  आनन्द  से  बैठा दो हे  चन्द्र मौलि  !हे चन्द्र  शेखर  ,जय जय हे  शंकर   भ्स्मांग  सुन्दर  ।
अज्ञान  मेरा  मुझसे  हे  नाथ  दूर  होवे ,अज्ञानता  के  कारण  बिगड़ी  सभी  बनादो
     तेरे  गले में  है  मुंडों  की  माला  ,हाथों में  त्रिशूल  डमरू  विशाला  ।
शम्भो  त्रिलोचन  हे  संकट  विमोचन  ,जय  जय  हे  शंकर  त्रिपुरारि सुन्दर   ।

ऐसा  अनुग्रह करदो  खुल  जाएँ  ज्ञान  चक्षु  ,इन  चक्षुओं  से अपने  प्रकाश  को  दिखादो 

तू  है महादेव त्रिभुवन  विजेता  ,गन्धर्व  किन्नर  पिशाचों  का राजा  ।
सम्मुख  तुम्हारे  है  नन्दी  विराजा  ,  हे चन्द्र मौलि हे  चन्द्र  शेखर    ।

मंजिल  है  दूर  मेरी  मार्ग  बड़ा  दुस्तर  है  ,मंजिल पर  शीघ्र  पहुँचे वह  रास्ता  बतादो  ।

बाँधा है    गंगा को  सिर पर  धरा  है  ,  हिमगिरी  की  कन्या  ने  तुझको  वरा  है
जय जय हे शंकर  भास्मांग  सुन्दर  हे  चन्द्र मौलि हे  चन्द्र  शेखर ।

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