Monday, 2 September 2013

लो जीने का मजा । दुनियां को लात मारो दुनिया तुम्हारी है

आगे जब तक है जीवन में बहाव तब तक ही जीवन  सार्थक  है 
कुछ  खोज  नहीं  कुछ हिम्मत  नहीं  फिर  जीने  का क्या मतलब  है ।

कुछ  नई  चुनौती  जहां  नहीं  समझो  जीवन  है  वहां  नहीं  ।
ओ   निर्झर  ! आगे   बढता  जा  , मत देख  कौन  अड़ा  तट  पर , 

जो आये  उसकी  फ़िक्र  न  कर  , जो रोके  उसकी  परवाह न कर  ।
जो  आगे  चलने से  झिझका ,वह पीछे खीँच  लिया  जाता ।   
लोगों की प्रतिक्रिया से  जो  डरता,  वह  नीचे  फिसल  फिसल  जाता  ।

तट पर बैठे  रह  जाओगे तो मोती  कैसे पाओगे, वह लहर कभी तो आएगी।
चल  पड़ो  उसी  की  राहों में ,  वह  मंजिल  कभी तो  आयेगी  ।
यह ही क्या  कुछ कम  है  कि चर्चा  मार्ग  की  हो  जायेगी  ।

क्या  यहाँ  शिकायत  करना,   किससे  क्या खोना  पाना है   ?
लेने वाला देने  वाला  हरि  है  इंसान  से   क्या  कुछ  होना है  ।

जीवन में कितने  मीत  मिले ,कुछ  आये  कितने  छुट गए  ।
सम्बन्ध  कभी   बन  जाते  है  कुछ कायम  रहे  कुछ  छुट  गए   ।

हे नट  नागर  !   तू  ही  संभाल  ,अपने वश  की  अब  बात  नहीं
मालूम सवेरा होना है,  पर कटती अब  ये  रात  नहीं।

कब तक  बांसुरी  बजाओगे  कब  मुझको  राह  दिखाओगे 
अब मुझको  बाहों में  भरलो  , मुझे    तृप्त और  सुखी  कर  दो ।

2 comments:

  1. मम्मी तुमने जीने का तरीका बहुत अच्छे से समझाया है

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  2. क्या बात है मम्मी, सही कहा है कोशिश ज़रूर करनी चाहिये.

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