Sunday, 18 August 2013

RAKHI स्नेह सूत्र

राखी  की  पावन  वेला में   एक  बहिन   अपने  भाइयों   को  याद  कर  रही   है  जो   व्यस्त है   अपनी  दुनियां  में ।..............

याद  के  कांटे  इस दिल  में  चुभते  हैं;  न  दर्द   ठहरता  है    न  आंसू   रुकते  हैं  आज  तुम   वे हिसाब  याद  आये ।
इस तरह गूंजी ख़ामोशी   मानो  सब  तरफ से  आवाज  आये   ।
मेरी   नजर  में  कुछ   लोग   ऐसे  ; निकलेंगे  कागज  के  फूल  जैसे  ।
रूप  ले  आयेंगे   रंग  ले  आयेंगे  खुशबु  कहाँ  से  लायेंगे  ।

रिश्ते   कहाँ खत्म  होते  हैं   जिन्दगी  के  सफर  में  ; मंजिल तो वहीँ है 
  जहाँ  ख्वाहिशें   मिटें   ।         अपनी  मर्जी  से  कहाँ हम  अपना  सफर 
तय   करते  हैं   ।
गाँठ  अगर  लग  जाये  तो   रिश्ते  हों या   डोरी   ;    लाख  करो  कोशिश
तो  खुलने  में  वक्त तो  लगता    है     
बात  निकलेगी  तो   दूर  तलक  असर  डालेगी  .......
खुदा  के  बन्दों  को  देख   करके  ;  खुदा  से  मुनकिर हुई  है  दुनिया  ।
कि ये  कैसा  खुदा है  यारो; बहाता  दिलों  में  रसधारा  नही  है  ।।।।। 
       लोग   परायण  धन   के  ।  न कि  रिश्तों  के   ।।।।।।

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