Sunday, 18 August 2013

MIRROR दर्पण SHADOW

एक सन्यासी    world  tour को निकला   ।  अभी  वह  युवा  था  ।
लेकिन जब वह  वापिस  आया  बुड्डा  हो चुका  था  ।अपने देश   में  उसका
खूब   स्वागत  हुआ  ।  राजधानी में  जो  राजा था वह  उसका  सहपाठी  था   ।
  राजा   बड़ा  खुश  हुआ  उससे  मिलकर  ।
सन्यासी  के  चरण  छू कर  बोला कि  मैं  बड़ी  उत्सुकता से  तुमारी  प्रतीक्षा
कर  रहा था   ।बताओ   मेरे  लिए  क्या  लाये  हो  ?
फकीर  बोला  मुझे  पता था कि  तुम  जरुर यही  पूछोगे  ।
पर तुम्हारे  महलों  में   दुनिया की  सारी  संपदा है  । तो  क्या  ले  चलूँ   ?
  जिसकी  तुम्हे कमी   हो  सकती  है  ।
फकीर  के  पास  एक  झोला  था  जो  फटा  हुआ  था   ।  राजा  यह  देखने  के  लिए  उसे  अपने  महल  में  ले  गया  कि  झोले  में मेरे  लिए  कुछ  न    कुछ
जरुर है    ।
महल  में जाकर  राजा  बोला अब दिखाओ  ।
उस  फकीर  ने  झोले  से  जो  निकाला  वह   बड़ी  साधारण सी  चीज  थी  ।
एक  छोटा  सा  दर्पण ।   आइना चार पैसे  वाला  ।
उसने  राजा  को वो दे दिया   ।
राजा.....यह दर्पण लाये हो । फकीर...... हाँ  ।  राजाओं  के पास  यही  चीज  नहीं होती  ।  दुनिया  में बहुत  कम लोग  है   जो   खुद को  देखने में  समर्थ   होते  है   जिस  दिन  तुम  खुद  को  देखने  में  समर्थ  हो  जाओगे  समझना ।
तुम्हें  दर्पण  उपलब्ध  हुआ  ।
रहस्य की बात यह है जो खुद  को  जान  लेता हो  वह परमात्मा  को  भी  जान
  लेता है ।।।।।।।।।

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