Sunday, 18 August 2013

DYER OF SOUL

  मेरा  सत गुरु  है  रंगरेज   चुंदर  मोरी  रंग   डारी  ।

स्याही    रंग  छुडाय  के     रे  दियौ   मजीठो     रंग  ।

धोये ते  छूटे  नहीं    रे   दिन  दिन  होत     सुरंग।।।  चुंदर मोरी रंग  डारी

भाव  का  कुंड  स्नेह  के    जल में  प्रेम  रंग  दिया     डाल  

गुढा रंग   लगाई  के  रे   खूब  किया  लालोंलाल   ।चुंदर मोरी     रंग   डारी

सत गुरु   ने   चुंदरी  रंगी  रे  सत गुरु  चतुर   सुजान  

सब  कुछ  उनपर  वार  दूँ  रे  तन मन धन  ओ  प्राण   ।चुंदर  मोरी  रा ग  डारी

कहे कबीर   रंगरेज  गुरु  रे  मुझ  पर  भये  दयाल

लाली   चुंदरी  ओढ़ी  के  रे  हो  गई    मगन  निहाल।। चुंदर मोरी  रंग  डारी ।

सत गुरु   ओ  महाराज   मोपे   हरी रंग  डारो    प्रभु रंग डारो  ।।।।।।।

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