Friday, 23 August 2013

रंग लीनी चुन्दरिया तेरे रंग में

हे  !   प्रभो     अपने   ही   रंग  में  मुझे  रंग    दो    
  
मेरा   रूप  हो  जो  तेरा रूप  हो   ;मेरा रंग  हो  जो  तेरा  रंग  हो  ।
मेरारंग हो  जो तेरा  रंग हो  ; मेरा  रूप  हो  जो  तेरा  रूप  हो   ।
गर  रंग  हो  तो  तेरा रंग  हो  ;   गर रूप  हो  तो  तेरा  रूप  हो  ।
गर  आरजू  हो  तो  तेरे    नाम  हो  ; गर जुस्तजू  हो  तो  तेरे  नाम  हो ।
गर  बात  हो  तो  तेरी  बात  हो  ;  साथ हो  तो  तेरा साथ  हो  ।
गर  प्राण  हों  तो  तेरे  नाम  हों   ; गर   जान हो तो  तेरे   नाम  हो   ।
गर   जीना  हो  तो  तेरे नाम  हो  ;  गर मरना हो तो  तेरे  नाम  हो  ।
तेरे   नाम  हो  तेरे  नाम  हो तेरे  नाम  हो  तेरे  नाम  हो  ।
तेरे  नाम  हो  तेरे  नाम  हो तेरे नाम हो  तेरे  नाम हो  ।
तेरे   चेहरे   पर   नजारे   जन्नत  के  ;तेरे   चेहरे  पर  रब  दिखता  है  ।
तेरे  रूप  में   प्रभु  दिखता  है  ।
जय जय गुरुदेव  जय  जय  गुरुदेव गुरुदेव  गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव्
गुरु ॐ गुरुओम गुरु  ॐ गुरु ॐ  ।गुरु  ॐ  गुरुओम  ।  
गर  सजदा  हो  तो  तेरे  नाम  हो 
    ।               गर  इबादत  हो  तो तेरे  नाम हो  ।।।।।।।

3 comments:

  1. दिन ढल गया साँझ हो आई,
    मन की गति पर कम न हो पाई,
    भाग रहा चहूँ ओर कुलाचे भरता,
    तन की शिथिलता भी उसे रोक न पाई।
    मचल जाता है आज भी छोटे बच्चे की तरह,
    कपड़े हों,किताबें या फल ओ मिठाई,
    याद आती है अपनी उम्र तब,
    जब गलती से दर्पण में मुखड़ा दे दिखाई।
    चांदी के बालों से झाँकता ये कौन,
    क्या ये मैं हूँ भाई?
    इक हूक सी उठती है सीने में,
    कहाँ खो गई वो चंचल चितवन,
    कहाँ गई वो तरुणाई।
    न मन का खाया, घूमा या किया,
    आह सारी उम्र मैंने यूं ही गवाई।
    अब याद आया जब चलने की आहट दी सुनाई

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    1. Didi,

      With your permission, I am including this beautiful poem in my Hindi Blog

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