Sunday, 25 August 2013

श्री कृष्ण और नारद

नारद जी  को  अपना  घर   बसाने  की  बड़ी  लालसा    रहती  थी  । वह  कई   बार  इस  बात  का  जिक्र  भगवान्  के  आगे  कर  चुके थे ।



भगवान्  भी  उन  ब्रह्मचारी   का   भ्रम  मिटाना चाहते  थे  अत: एक   दिन श्री  क्रष्ण  और  नारद  दोनों  घुमने  निकले   । मार्ग में   नारद  ने  कहा  आप  तो  ग्रहस्थ  है  सोलह   हजार  रानियाँ  है   ; मेरी भी  ......
इसके  आगे  चुप होगये  ।  श्री क्रष्ण ने  कहा  इस  सम्बन्ध  में बात  अभी करते  हैं  । मुझे बड़ी  जोर की  प्यास  लगी  है  ज़रा उस  नदी  से  एक  लोटा  पानी  ले  आओ  ।  नारद  जी  गए  पानी  ले ने "  पानी में  दो  मछलियों    का  जोड़ा किलोल   कर  रहा  था  ।वे सम्मोहित  होगये
उनको , देखते  देखते  लगा कि  वे  एक  घर में  पानी लेने गए हैं पानी देने के लिए  एक सुन्दरी  कन्या  आई  , वह  उनको  इतनी  पसंद    आई  कि वे उसके  पीछे पीछे  घर  में  चले  गए  ।  उससे    विवाह  रचा  लिया  ।
अब  उनके  बच्चे  हो  गए   एक   दो   तीन    चार   ।वे अपनी  ग्रहस्थी  में बहुत  मग्न  है  खुश  हैं   ।तभी  अचानक   एक दिन  इतने  जोरों  की वारिश  हुई  कि  सारे    गाँव में   बाढ  आ  गई  । 
सब    गाँव  के  लोग   सुरक्षित स्थान  पर   जाने  लगे  ।  नारद जी  भी  अपनी  पत्नी  का हाथ  पकड़ कर    घर  के   बाहर  निकल  आये दो  छोटे  बच्चे  उनके कंधों पर  , दो को  ऊँगली पकड़ कर  चले ।
पानी  का  वेग  इतना  अधिक  था    कि  पत्नी  का  हाथ   छुट  गया  वे  रोने  लगे  , तभी  ऊँगली  पकडे हुए  बच्चे  भी  पानी के  वेग में  बह गए ।  अब  पानी  उनके   सिर  तक  आगया   ।कंधे पर  बैठे  बच्चे  भी न  मालुम  किधर  बह गए । नारदजी  स्वयम  बचने  के  लिए  एक पेड़ की  डाली  पकड़  कर पेड़  पर   बड़ी  कठिनाई   से  चढे ।
पेड़  पर  चढ़ते  ही  सम्मोहन  खत्म  हो  गया   ,  देखा  सामने श्री क्रष्ण  खड़े  मुस्करा रहे  थे  ।  कहा  बड़ी देर  लगादी  पानी   लाने  में । हाँ    विवाह   करोगे   ।

1 comment:

  1. जीवन क्या है खुली आँख का सपना,
    आँख बंद होते ही सपना टूट जाएगा।
    मिट्टी का शरीर मिट्टी में मिल जाएगा.

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